तीर्थस्थलों की घटनाओं के बाद सिंहेश्वर मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

तीर्थ स्थलों की घटना के बाद सिद्धेश्वर मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी 


कोशी तक/सिंहेश्वर मधेपुरा:- देश के विभिन्न प्रमुख तीर्थस्थलों पर हाल के दिनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच हुई घटनाओं को देखते हुए सिंहेश्वर धाम में भी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती। सावन की तीसरी सोमवारी को श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। थानाध्यक्ष देर शाम तक सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ की स्थिति पर नजर बनाए रहे।

लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी को भारी भीड़ के दौरान भगदड़ की घटना में सात श्रद्धालुओं की मौत और कई लोगों के घायल होने की सूचना के बाद प्रशासन ने धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष सावधानी बरती। वहीं, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के समीप हरसिद्धि चौराहे पर नागपंचमी और सावन सोमवार के दौरान करंट फैलने की अफवाह के बाद अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हुई, जिसमें बैरिकेडिंग और टेंट गिरने से कई श्रद्धालु घायल हुए। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के तारापीठ मंदिर के समीप एक होटल में आग लगने से भी कई लोगों की मौत और घायल होने की घटना सामने आई।

इन घटनाओं के मद्देनजर सिंहेश्वर मंदिर में पहले से तैयार भीड़ नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत किया गया। मंदिर न्यास समिति के प्रबंधक भवेश कुमार ने बताया कि तीसरी सोमवारी को लेकर जिला प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड में था। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चार अतिरिक्त बैरिकेडिंग बनाई गई थी। श्रद्धालुओं की कतार को शिवगंगा की ओर से व्यवस्थित तरीके से बैरिकेडिंग के माध्यम से मंदिर की ओर लाया गया।

उन्होंने बताया कि भीड़ को अलग-अलग कतारों में नियंत्रित करने और लगातार निगरानी रखने से श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। मंदिर परिसर में तैनात पुलिस बल एवं अन्य कर्मियों द्वारा भीड़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई।

प्रशासन की सतर्कता और व्यवस्थित कतार व्यवस्था के कारण तीसरी सोमवारी को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद सिंहेश्वर धाम में स्थिति नियंत्रण में रही। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के प्रमुख स्थानों पर भी पुलिस बल की मौजूदगी रही।

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