सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति पर परिषद की कार्रवाई तेज, डीएम ने भेजा विस्तृत जवाब

डीएम ने धार्मिक बोर्ड को भेजा जबाब, सदस्यों में मची खलबली 


कोशी तक/ सिंहेश्वर मधेपुरा:- बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद, पटना द्वारा सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति से जुड़े विभिन्न मामलों पर मांगी गई रिपोर्ट के बाद मंदिर प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। परिषद ने न्यास समिति की बैठक में पारित प्रस्ताव, पार्किंग बंदोबस्ती, विभागीय वसूली, आय-व्यय विवरणी, पार्षद शुल्क जमा करने तथा छह पार्षद सदस्यों द्वारा प्रबंधक एवं लेखापाल को पदमुक्त करने की मांग सहित कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके जवाब में न्यास समिति के अध्यक्ष सह जिला पदाधिकारी अभिषेक रंजन ने परिषद को विस्तृत प्रतिवेदन भेज दिया है।

डीएम ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि 4 जून 2026 को आयोजित न्यास समिति की बैठक में लिए गए निर्णय सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। पार्किंग बंदोबस्ती के मामले में बताया गया कि संवेदक विजय कुमार सिंह को दूसरी किस्त जमा करने के लिए कई बार पत्र जारी कर 19 जून 2026 तक का समय दिया गया, लेकिन निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं की गई। इसके बावजूद बिना सूचना के अलग खाते में 13,84,333 रुपये जमा कर दिए गए, जो इकरारनामा की शर्तों के अनुरूप नहीं था। साथ ही जीएसटी भुगतान नहीं करने को लेकर राज्य कर विभाग द्वारा भी नोटिस जारी किया गया था। इन परिस्थितियों में राजस्व हित को देखते हुए बंदोबस्ती रद्द कर विभागीय वसूली शुरू करने का निर्णय लिया गया।

डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि त्रैमासिक शुल्क अग्रिम रूप से लेने का कोई प्रावधान नहीं था। ऐसा करने से अन्य संवेदकों के साथ पक्षपात की स्थिति उत्पन्न होती, इसलिए बंदोबस्ती रद्द कर विभागीय स्तर पर पार्किंग शुल्क वसूली प्रारंभ की गई।

परिषद द्वारा आय-व्यय विवरणी, बजट एवं पार्षद शुल्क जमा करने के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर डीएम ने बताया कि आवश्यक अभिलेख पूर्व में ही परिषद को भेजे जा चुके हैं। वहीं, छह पार्षद सदस्यों द्वारा प्रबंधक एवं लेखापाल के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच डीडीसी अनिल बसाक द्वारा नियमानुसार कराई जा रही है।

न्यास समिति को भंग करने की मांग पर डीएम ने अपने जवाब में कहा कि इस संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के पास है। परिषद के समक्ष भेजे गए इस विस्तृत प्रतिवेदन के बाद अब सभी की निगाहें परिषद के आगामी निर्णय पर टिकी हैं। जिसको लेकर कई आरोपी सदस्यों में खलबली मची हुई है। और एक दुसरे पर संदेह भी कर रहे हैं।

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