'रैशनलाइजेशन' के नाम पर शिक्षकों को मनमाने ढंग से सरप्लस घोषित करना बंद करे सरकार: शैलेश कुमार चौरसिया


जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ने स्थानांतरण नीति को बताया त्रुटिपूर्ण, पारदर्शी व्यवस्था की उठाई मांग


कोशी तक/मधेपुरा:- जिला प्राथमिक शिक्षक संघ, मधेपुरा के जिला कोषाध्यक्ष शैलेश कुमार चौरसिया ने राज्य सरकार की शिक्षक स्थानांतरण एवं रैशनलाइजेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। उन्होंने वर्तमान स्थानांतरण नीति को त्रुटिपूर्ण बताते हुए इसमें तत्काल सुधार की मांग की है।

शैलेश कुमार चौरसिया ने कहा कि रैशनलाइजेशन के नाम पर बड़ी संख्या में शिक्षकों को मनमाने तरीके से 'सरप्लस' (अधिशेष) घोषित कर दूसरे विद्यालयों में समायोजित किया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध तथा विभागीय मनमानी का परिचायक है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति स्वीकृत रिक्त पदों पर विधिवत हुई थी, उन्हें भी अधिशेष घोषित किया जा रहा है, जबकि उनके बाद नियुक्त शिक्षकों को सरप्लस नहीं माना जा रहा है। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि दिव्यांग शिक्षक, गंभीर रूप से बीमार शिक्षक तथा सेवानिवृत्ति के निकट पहुंच चुके शिक्षकों को भी सरप्लस घोषित कर स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में असुरक्षा और असंतोष का माहौल है।

जिला कोषाध्यक्ष ने राज्य सरकार से मांग की कि वर्तमान सरप्लस एवं स्थानांतरण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा रैशनलाइजेशन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, न्यायसंगत और वस्तुनिष्ठ बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानांतरण में इच्छुक शिक्षकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

शैलेश कुमार चौरसिया ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा विभाग शीघ्र ही इस कथित मनमानी पर रोक लगाकर आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाता है, तो बिहार के शिक्षक संगठन शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए राज्यव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन चलाने को बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की होगी।

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