बैहरारी में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भक्ति-ज्ञान की गंगा बही

श्रीमदभागवत कथा में पुर्व विधायक ने दी उपस्थिति श्रीमद्भागवत कथा में कथा सुनने उमड़ी भीड़ 



कोशी तक/शंकरपुर मधेपुरा:- शंकरपुर प्रखंड अंतर्गत बैहरारी गांव में आयोजित सार्वजनिक साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को विधिवत दीप प्रज्वलन कर कथा का शुभारंभ किया गया। दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में राजद के पूर्व विधायक चन्द्रहास चोपाल, पतंजलि जिला युवा प्रभारी उपेन्द्र कुमार योगी, सुकराती सरदार, दयानंद सरदार, वृक्ष लाल सरदार, सुरेन सरदार सहित अन्य कथा आयोजक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक चन्द्रहास चोपाल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा समाज में नैतिक मूल्यों, भक्ति और प्रेम का संचार करती है। जब परिवार और समाज एक साथ मिलकर कथा का श्रवण करते हैं तो आपसी प्रेम, संबंध और सौहार्द मजबूत होता है। इससे लोग कर्तव्य बोध के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित होते हैं।

कथा व्यास चित्रकूट धाम से पधारे पं. विनोद पटेरिया महाराज जी ने तीसरे दिन भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से परिपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार धर्मनिष्ठ एवं प्रजा पालक राजा परीक्षित ने क्रोधवश शमीक ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया, जिसके फलस्वरूप ऋषि पुत्र शृंगी ने उन्हें सात दिन में तक्षक नाग के काटने का श्राप दिया। आचार्य ने कहा कि यही श्राप आगे चलकर राजा परीक्षित के मोक्ष का कारण बना और श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का आधार बना।

कथा के दौरान शुकदेव जी महाराज के प्रादुर्भाव का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि वे गर्भ से ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर चुके थे और जन्म लेते ही गृह त्याग कर वन चले गए। यह प्रसंग वैराग्य और आत्मज्ञान की चरम अवस्था को दर्शाता है। इसके साथ ही भगवान कपिल देव द्वारा माता देवहूति को दिए गए उपदेशों का भी विस्तार से वर्णन किया गया।

कथा के अंत में देवी शती के प्रसंग का उल्लेख किया गया। कथा व्यास ने बताया कि पिता दक्ष प्रजापति द्वारा भगवान शिव के अपमान को सहन न कर देवी शती ने योगाग्नि में आत्माहुति दी। उन्होंने इसे नारी के आत्मबल, अस्मिता और पति-भक्ति का जीवंत उदाहरण बताया।

मंच संचालन कर रहे उपेन्द्र कुमार योगी ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक पुराण नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा और दृष्टि देने वाला ग्रंथ है। जीवन की अंतिम यात्रा में भक्ति, वैराग्य और ज्ञान ही मनुष्य के साथ चलते हैं।

कथा के दौरान महिलाएं और पुरुष मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण कर रहे थे। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में ग्रामवासी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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