कोशी तक/शंकरपुर मधेपुरा:- शंकरपुर प्रखंड अंतर्गत बैहरारी गांव में आयोजित सार्वजनिक साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को कथा आयोजकों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कथा का शुभारंभ किया गया।
चित्रकूट धाम से पधारे कथा व्यास पंडित विनोद पटेरिया महाराज ने आत्मदेव के पुत्र धुंधकारी एवं गोकर्ण की जन्म कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने से प्रेत योनि में जन्मे धुंधकारी को भी मुक्ति प्राप्त हुई थी, जो इस महापुराण की महिमा को दर्शाता है।
कथा के दौरान महाराज ने बताया कि आत्मदेव नामक एक विद्वान एवं तेजस्वी ब्राह्मण अपनी पत्नी धुंधली के साथ रहते थे। अपार संपत्ति और सुख-सुविधाएं होने के बावजूद उनके घर में शांति नहीं थी, क्योंकि उन्हें कोई संतान नहीं थी। इसी चिंता से व्यथित होकर आत्मदेव जंगल चले गए, जहां उनकी भेंट एक ऋषि से हुई। ऋषि ने समस्या जानकर उन्हें एक फल दिया और उसे पत्नी को खिलाने का निर्देश दिया। लेकिन धुंधली ने छलपूर्वक वह फल गाय को खिला दिया, जिससे गाय के गर्भ से गोकर्ण का जन्म हुआ।
आत्मदेव ने उसका नाम गोकर्ण रखा। गोकर्ण भगवान का परम भक्त और साधु स्वभाव का निकला, जबकि धुंधली का पुत्र धुंधकारी अत्यंत दुराचारी और नीच प्रवृत्ति का हुआ, जिसके कारण उसे प्रेत योनि की प्राप्ति हुई। आगे चलकर गोकर्ण ने अपने भाई धुंधकारी को श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण कराया, जिसके प्रभाव से उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिली और वह भगवान नारायण के धाम को प्राप्त हुआ।
वहीं मंच संचालन कर रहे उपेन्द्र कुमार योगी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन के उद्देश्य और सही दिशा का बोध कराती है। कथा के दौरान भक्ति गीतों पर श्रद्धालु जयकारों के साथ झूमते नजर आए।
इस आयोजन को सफल बनाने में वृक्ष लाल सरदार, गजेन्द्र यादव, सुकराती सरदार, जोगी सरदार, श्री प्रसाद चौधरी, वेचन चौधरी, श्याम, जसेन, सुमन, दुखी, उपेन्द्र सरदार सहित सभी ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।

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