कन्याकुमारी द्वारा मेला का उद्घाटन करवाते जिला प्रशासन
मेला मंच उद्घाटन करते डीएम, एसपी, सीएस और अन्य
कोशी तक/सिंहेश्वर मधेपुरा:- बिहार के प्रसिद्ध महाशिवरात्रि मेला का उद्घाटन एक बार फिर परंपरागत रूप से 9 कुंवारी कन्याओं द्वारा किया गया। पूर्व निर्धारित उद्घाटन कर्ता कोशी प्रमंडल के आयुक्त के कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाने के कारण उद्घाटन की जिम्मेदारी कन्याओं को सौंपी गई।
इस अवसर पर डीआरडीए मंच से लोगों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने कहा कि महाशिवरात्रि मेले को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है। मेला परिसर में विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक पदाधिकारी अपने दलबल के साथ लगातार निगरानी कर रहे हैं। साथ ही पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे उपद्रवियों पर कड़ी नजर रखी जा सके।
बाल विकास के स्टाल पर अन्नप्रासन की रश्म निभाते डीएम
जिलाधिकारी ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में मेला आने की अपील करते हुए कहा कि सभी लोग शांतिपूर्वक बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर मेले का आनंद लें। अपने संबोधन के उपरांत डीएम अभिषेक रंजन ने जनसंपर्क विभाग सहित विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया। इसके बाद मीना बाजार में बाल विकास परियोजना, मीना बाजार, आत्मा कार्यालय, मत्स्य विभाग, जीविका, गव्य विकास, बागवानी, मिट्टी जांच, सहकारिता विभाग, इफको, देहात, हुरल/पीपीएल, मनीपुरी बाम्बों, मशरूम, ब्लेक आलु, पायोनियर सीड्स, प्रगतिशील कृषक उपेन्द्र योगी, फॉर्मर रजिस्ट्री केंद्र, जय बाबा एग्रीकल्चर, हिंदुस्तान एग्रीकल्चर, दुर्गा मिशनरी, में शंकर एग्रीकल्चर, बजरंग एग्रो ग्वालपाड़ा सहित लगभग 30 कृषि सामग्री, कृषि प्रदर्शनी एवं कृषि यंत्रों के स्टॉल का भी उद्घाटन किया गया।
कृषि रसायन के बारे में जानकारी लेते डीएम,एसपी,सीएस
एनसीसी कैडेट्स के साथ डीएम सहित जिला प्रशासन
मेला उद्घाटन से दूर रहे जनप्रतिनिधि
महाशिवरात्रि मेला उद्घाटन कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। आरोप है कि जिला प्रशासन एवं न्यास समिति की ओर से जनप्रतिनिधियों को उद्घाटन कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं दिया गया। इसी कारण प्रमुख इस्तियाक आलम, मुखिया संघ अध्यक्ष सह सुखासन पंचायत के मुखिया किशोर कुमार ‘पप्पू’, नगर पंचायत अध्यक्षा पुनम कुमारी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उद्घाटन कार्यक्रम में भाग नहीं लिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति जरूरी होती है, ताकि आयोजन की गरिमा और सहभागिता और अधिक मजबूत हो सके।
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