सिंहेश्वर में उमड़ी आस्था की भीड़ अफरातफरी में की श्रद्धालु घायल
कोशी तक /सिंहेश्वर मधेपुरा:- अंतिम सोमवारी को बाबा सिंहेश्वर नाथ के जलाभिषेक के लिए सिंहेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रविवार रात करीब नौ बजे से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया था। रात बढ़ने के साथ भीड़ लगातार बढ़ती गई। लगभग 2 लाख श्रदालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर के बायपास स्थित मुख्य गेट को बंद कर दिया गया। रात करीब एक बजे तक हजारों श्रद्धालु गेट के बाहर जमा हो गए और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच गेट खोलने की मांग करने लगे।
इसी दौरान प्रशासन द्वारा बड़ा गेट खोले जाने के बाद भीड़ अचानक एक झोंके के साथ मंदिर परिसर की ओर बढ़ गई। भीड़ का दबाव बढ़ते ही कई श्रद्धालु नीचे गिर पड़े और अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ श्रद्धालु भीड़ की चपेट में आकर घायल हो गए। एक महिला के सिर में गंभीर चोट लगी। करीब चार से पांच श्रद्धालुओं के घायल होने की बात सामने आई है, जिनका इलाज जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज में कराया जा रहा है।
साढ़े 12 बजे सरकारी पूजा, एक बजे श्रद्धालुओं के लिए खुला पट
बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर का पट साढ़े 12 बजे सरकारी पूजा के बाद रात एक बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण नई बैरिकेडिंग भीड़ के दबाव को संभाल नहीं सकी। इसके बाद बाहर का गेट खोलना पड़ा। गेट खुलते ही अचानक बढ़े दबाव के कारण हादसे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
श्रद्धालुओं और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भीड़ के बीच घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी हुई। चारों तरफ श्रद्धालुओं की भीड़ होने के कारण आपातकालीन रास्ता उपलब्ध नहीं हो सका। बताया गया कि नाग गेट के रास्ते पर सावन के दौरान हर वर्ष एक मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति रहती थी, लेकिन इस बार वहां ऐसी व्यवस्था नहीं रहने के कारण आपात स्थिति में उस रास्ते का प्रभावी उपयोग नहीं हो सका।
डाकबम और दंड प्रणाम करने वालों को बीच से प्रवेश
अंतिम सोमवारी को डाकबम और दंड प्रणाम करने वाले श्रद्धालुओं को भीड़ के बीच से मंदिर में प्रवेश कराया गया। अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए महिला कतार में पुरुषों तथा महिलाओं को भी कुछ स्थानों पर बीच से प्रवेश देने की व्यवस्था की गई।
मंदिर में जलाभिषेक के बाद कई डाकबम श्रद्धालु थकान और कमजोरी के कारण बेसुध होकर गिर पड़े। इस दौरान श्रृंगीऋषि सेवा फाउंडेशन के स्वयंसेवक लगातार सेवा में जुटे रहे। स्वयंसेवकों ने बेसुध श्रद्धालुओं को अपने कंधों पर उठाकर सेवा शिविर तक पहुंचाया। वहीं घायल श्रद्धालुओं को स्ट्रेचर ट्रॉली के माध्यम से मंदिर परिसर से बाहर निकालकर शिविर तक ले जाया गया।
आपातकालीन रास्ता नहीं खुलने के कारण गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं को अस्पताल तक पहुंचाने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
मेडिकल शिविर में चिकित्सकों ने संभाला मोर्चा
अफरातफरी के बाद सेवा एवं चिकित्सा शिविर में घायलों और अस्वस्थ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी। शिविर में डॉ. रविन्द्र कुमार सहित तीन चिकित्सक और आठ जीएनएम श्रद्धालुओं के इलाज में जुटे रहे। चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने घायल और थकान से बेहाल श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया।
बताया गया कि सदर अस्पताल से अतिरिक्त चिकित्सकों को भेजे जाने की बात होती रही, लेकिन मौके पर अतिरिक्त चिकित्सकीय टीम नहीं पहुंच सकी। अंतिम सोमवारी की भारी भीड़ के बीच स्वास्थ्यकर्मियों और स्वयंसेवकों ने लगातार काम करते हुए श्रद्धालुओं को राहत पहुंचाने का प्रयास किया।
अंतिम सोमवारी के दौरान हुई इस अफरातफरी ने सिंहेश्वर धाम में भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए भविष्य में आपातकालीन रास्ते को हमेशा खुला रखने तथा भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत महसूस की गई।
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