हाईकोर्ट पहुंचा सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति के पंडा प्रतिनिधियों का विवाद। पंडा समाज के दो सदस्यों की नियुक्ति पर उठे सवाल, धार्मिक न्यास बोर्ड को चार सप्ताह में फैसला लेने का निर्देश

पंडा प्रतिनिधि के विवाद का अंतिम फैसला धार्मिक न्यास परिषद पर


कोशी तक/सिंहेश्वर मधेपुरा:- सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति में पंडा समाज के दो प्रतिनिधियों की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड को निर्देश दिया है कि सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से चार सप्ताह के भीतर नियमानुसार कारणयुक्त (Reasoned) आदेश पारित करे।

न्यायमूर्ति ए. अभिषेक रेड्डी की एकल पीठ ने सिविल रिट क्षेत्राधिकार वाद (सीडब्ल्यूजेसी) संख्या 11478/2026 की सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है। अंतिम निर्णय बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ही सभी पक्षों की सुनवाई के बाद करेगा।

पंडा समाज के चयन को लेकर उठाया विवाद

याचिकाकर्ता कलानंद ठाकुर एवं धर्म नारायण ठाकुर ने याचिका में कहा है कि सिंहेश्वर स्थान मंदिर ट्रस्ट समिति की योजना (स्कीम) के अनुसार पंडा समाज से निर्वाचित दो व्यक्तियों को न्यास समिति का सदस्य बनाया जाना अनिवार्य है। उनका दावा है कि पंडा समाज के पंजीकृत 14 परिवारों के बहुमत से उनका चयन किया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने 25 अप्रैल 2025 की अधिसूचना के माध्यम से पंडा समाज की सीट पर संजीव कुमार ठाकुर और रोशन कुमार को सदस्य मनोनीत कर दिया, जो ट्रस्ट की निर्धारित व्यवस्था के विपरीत है।

पुराने अभ्यावेदनों पर नहीं हुआ निर्णय

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने इस संबंध में 10 जून 2025 एवं 6 जनवरी 2026 को धार्मिक न्यास बोर्ड के समक्ष अभ्यावेदन दिया था, लेकिन उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।

सुनवाई के दौरान धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से भी अदालत को बताया गया कि यदि न्यायालय निर्देश देता है तो बोर्ड को अभ्यावेदनों का कानून के अनुसार निस्तारण करने में कोई आपत्ति नहीं है।

हाईकोर्ट का निर्देश

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदनों पर सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर चार सप्ताह के भीतर विधिसम्मत एवं कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। साथ ही पारित आदेश की प्रति संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया।

इस आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया। अब इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा सुनवाई के बाद लिया जाएगा।

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