उपेक्षा से आहत जनप्रतिनिधियों ने सिंहेश्वर महोत्सव से दूरी बनाने का लिया निर्णय

 आक्रोश व्यक्त करते स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने की बैठक 


कोशी तक/सिंहेश्वर मधेपुरा:- जिला प्रशासन द्वारा लगातार सिंहेश्वर के जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय बुद्धिजीवियों की अनदेखी किए जाने से आक्रोश व्याप्त है। इसी के विरोध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सिंहेश्वर महोत्सव में शिरकत नहीं करने का सामूहिक निर्णय लिया है।

इस संबंध में सिंहेश्वर प्रमुख इस्तियाक आलम, उप-प्रमुख मुकेश यादव एवं मुखिया संघ अध्यक्ष किशोर कुमार पप्पू ने संयुक्त रूप से बताया कि सिंहेश्वर में परंपरागत रूप से श्रावणी मेला, महाशिवरात्रि मेला एवं अन्य धार्मिक आयोजनों से पूर्व प्रशासन और मंदिर न्यास समिति द्वारा जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आपसी सहमति से आयोजन किया जाता रहा है।

लेकिन पिछ्ले तीन वर्षों से न तो किसी प्रकार की बैठक बुलाई जा रही है और न ही जनप्रतिनिधियों को आयोजनों में आमंत्रित किया जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के बजाय मंदिर परिसर को चारों ओर से बैरिकेडिंग कर बंद कर दिया जाता है, जिससे भीड़ प्रबंधन के नाम पर श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी होती है। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रकार की व्यवस्था से कभी भी भगदड़ जैसी गंभीर घटना घट सकती है।

उन्होंने बीते सावन माह की एक घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि राम-जानकी मंदिर के पास बिजली बोर्ड में पानी भर जाने से पूरे दीवार में करंट फैल गया था, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु बैरिकेडिंग के बीच फंसे थे। संयोगवश उसी समय बिजली कटने से एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

मुखिया संघ अध्यक्ष किशोर कुमार पप्पू ने कहा कि सिंहेश्वर मेला और महोत्सव में कलाकारों के चयन तक में जनप्रतिनिधियों की राय नहीं ली जाती। कलाकारों के चयन के बाद केवल भीड़ जुटाने के उद्देश्य से जनप्रतिनिधियों को याद किया जाता है, जिससे वे स्वयं को सामाजिक रूप से उपेक्षित महसूस करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम भीड़ जुटाने के लिए जनप्रतिनिधि नहीं बने हैं। उचित सम्मान नहीं मिलने की स्थिति में हम सिंहेश्वर महोत्सव में भाग नहीं लेंगे।”

महाशिवरात्रि मेला उद्घाटन में भी नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि

महाशिवरात्रि मेला के उद्घाटन समारोह में भी जनप्रतिनिधियों को निमंत्रण नहीं दिया गया, जिसके कारण उद्घाटन स्थल एवं मंच पर उनकी उपस्थिति नहीं रही। इससे उद्घाटन समारोह फीका नजर आया।

इस अवसर पर मुखिया रामपट्टी विजय कुमार सिंह, कमरगामा के जय कृष्ण शर्मा, पटोरी के जय कृष्ण रजक, दुलार पीपराही के पप्पू यादव, बैहरी के शेखर गुप्ता, इटहरी गहुमनी प्रतिनिधि पिंटू कुमार, लालपुर सरोपट्टी के अंगद साह, पंसस अर्जुन आलोक, पटोरी प्रतिनिधि मनीष कुमार, नगर पंचायत प्रतिनिधि शिवचंद्र चौधरी सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। 

2 टिप्पणियाँ

  1. सिंघेश्वर मेला प्रबंधन में जो भी हो रहा है सही हो रहा है इसमें मुखिया सरपंच वार्ड सदस्य जिला परिषद और समिति को नहीं बुलाया वह सही है क्योंकि जितने भी प्रतिनिधि है वह अपना क्षेत्र तो खुद देख ही नहीं रहा है और प्रखंड कैसे देख पाएगा नहीं बुलाया वह बहुत अच्छा है 3 साल से क्या कभी बुलाए ही ना इसमें आपत्ति जताने से कोई मतलब नहीं है और जो मेला में चारों तरफ से बेरीकेटिंग हुआ है वह सही है जिसको भी तकलीफ है ना वह जाकर के सही कर ले क्योंकि बैरिकेटिंग करना सिक्योरिटी है इसमें कोई करंट लग रहा है खतरा नहीं है यह सब जो आप दिख रहे हो ना 10 रिपोर्ट मरवा दूंगा ना आपका वेबसाइट चला जाएगा इसलिए फालतू का पोस्ट ना डालो नहीं तो वेबसाइट से भी हाथ धो लोगे कृपया इसको संज्ञान में लो

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  2. वैसे भी मैं आपका रिस्पेक्ट कर रहा हूं इसलिए मैं आपके किसी भी पोस्ट पर कमेंट नहीं कर रहा हूं और ना ही रिपोर्ट कर रहा हूं इसलिए फालतू का पोस्ट आप मत कीजिए काम का ही पोस्ट कीजिए नहीं तो वेबसाइट से हाथ धो लीजिएगा

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