कोशी तक/सिंहेश्वर मधेपुरा:- नगर पंचायत सिंहेश्वर में ट्रांसफार्मर से तेल चोरी की लगातार घटनाओं ने बिजली विभाग, नगर पंचायत प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। हैरानी की बात यह है कि महज तीन दिनों के भीतर सात ट्रांसफार्मरों से तेल चोरी कर लिया गया और किसी को भनक तक नहीं लगी। इस दौरान न तो चोर पकड़े गए, न ही सुरक्षा व्यवस्था ने कोई जवाब दिया।
इन घटनाओं में नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड को करीब 19 लाख रुपये की आर्थिक क्षति होने का अनुमान है, जबकि करीब 500 परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
पहली चोरी की घटना 16 जनवरी 2026 को सामने आई, जब मेला ग्राउंड मवेशी हाट के पास नगर पंचायत क्षेत्र में लगे 200 केवीए क्षमता के दो ट्रांसफार्मरों से तेल चोरी की पुष्टि हुई। इसके ठीक दो दिन बाद, 18 जनवरी 2026 को लाइनमेनों द्वारा क्षेत्र निरीक्षण के दौरान नगर पंचायत के अलग-अलग इलाकों में लगे पांच अन्य ट्रांसफार्मरों से भी तेल चोरी का खुलासा हुआ। चोरी के कारण सभी ट्रांसफार्मर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकांश समय बिजली आपूर्ति चालू रहती है, तो ट्रांसफार्मरों से तेल चोरी आखिर कैसे संभव हो गई? क्या यह बिना स्थानीय जानकारी और मिलीभगत के मुमकिन है?
और उससे भी गंभीर सवाल—नगर पंचायत क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों में एक भी चोरी की घटना कैद क्यों नहीं हुई? क्या कैमरे खराब हैं, बंद हैं या सिर्फ दिखावे के लिए लगाए गए हैं?
बिजली आपूर्ति ठप होने से सिंहेश्वर के मुख्य बाजार की हालत बद से बदतर हो गई है। दुकानों पर ताले लटकने लगे हैं, शाम होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है और लोगों में डर व असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। व्यवसायियों और आम नागरिकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है।
स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग, नगर पंचायत प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच, सीसीटीवी कैमरों की तत्काल समीक्षा, और रात्रि गश्ती को सख्त करने की मांग की है।
इधर, विद्युत विभाग की ओर से अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और पुलिस जांच की बात कह रही है, लेकिन अब तक न कोई गिरफ्तारी हुई है और न ही कोई ठोस सुराग मिला है।
सवाल साफ है—
क्या यह सिर्फ चोरी है या सिस्टम की नाक के नीचे चल रहा कोई बड़ा खेल?
और जवाबदेही आखिर तय होगी या नहीं?

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