राष्ट्रीय मिशन प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि सखियां
कृषि सखियां खेती के नए तरीकों को सीखती
कोशी तक/ मधेपुरा:- कृषि विज्ञान केंद्र मधेपुरा में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय मिशन प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि सखियां खेती के नए तरीकों को सीख रही हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नोडल के रूप में उद्यान वैज्ञानिक डॉ. राहुल कुमार वर्मा, डॉ. सुनिल कुमार और फार्मर मास्टर ट्रेनर उपेंद्र कुमार योगी प्रशिक्षण दे रहे हैं।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:
प्राकृतिक खेती का महत्व: केंद्र के प्रधान वरिष्ठ वैज्ञानिक सुरेंद्र प्रसाद चोरसिया ने बताया कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का मार्ग है और इसे अपनाने से किसानों को उत्पादन में लागत क्षमता घटेगी।
जीवामृत और अन्य प्राकृतिक उत्पाद : उद्यान वैज्ञानिक राहुल कुमार वर्मा ने कृषि सखियों को जीवामृत, बीजा मृत, घनजीवामृत, अग्नि शास्त्र, ब्रह्मास्त्र, निमास्त्र और दसपर्णी अर्क बनाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
गाय का महत्व : फार्मर मास्टर ट्रेनर उपेंद्र कुमार योगी ने बताया कि गाय की गोबर और गोमूत्र प्राकृतिक खेती का आधार है और इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और मानव स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
प्रशिक्षण के उद्देश्य:
किसानों को आत्मनिर्भर बनाना : प्राकृतिक खेती को अपनाकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाना : प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और भोजन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
मानव स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव : प्राकृतिक खेती से मानव स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा मिलेगा।
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