18 सितंबर को पटना के बापू सभागार में जुटेंगे बिहार के मठ मंदिर के मठाधीश। सनातन को मजबूत करने के विचारों का होगा समागम।

समागम का उद्देश्य बताते बिहार धार्मिक बोर्ड अध्यक्ष रनवीर नंदन 
धार्मिक न्यास बोर्ड अध्यक्ष ने बताया समागम का कारण 


कोशी तक/पटना:-  सनातनियों को एक मंच पर लाने और सनातन के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए धार्मिक न्यास परिषद पटना के अध्यक्ष प्रो. रनवीर नंदन ने 18 सितंबर को पटना के बापु सभागार में धार्मिक न्यास समागम का आयोजन किया है। इस बाबत बिहार न्यास धार्मिक बोर्ड के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने बताया की बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड निर्णय लिया है की बोर्ड के अंदर जितने भी रजिस्टर्ड मठ मंदिर और धर्मशाला है। सब का एक समागम हो।  मुख्यतः धार्मिक न्यास बिहार ने सनातन के लिए कुछ कार्यक्रम निर्धारित किया। और हमारी परंपर को कैसे जिवंत किया जा सकता है। उस समागम में निर्णय ले। हम लोगों ने सोचा समाज में कौन ऐसा काम करे जो समाज को बेहतर बनाने में काम आए। बोर्ड अध्यक्ष श्री नंदन ने कहा पहले आप देखते होंगे हर घर में पुर्णिमा के अवसर पर सत्य नारायण भगवान की कथा और अमावस्या पर भगवती का पुजन होता था। जो  आज काफी कम है। हम चाहते हैं सभी धार्मिक संस्थान इस प्रचार प्रसार करे ताकि हर घर में पुर्णिमा को सत्य नारायण भगवान की कथा और अमावस्या को भगवती की कथा हो, हर घर में सुंदर कांड का पाठ हो, हनुमान चालीसा का पाठ हो, दुर्गा सप्तशती का पाठ हो। सनातन को आगे बढ़ाने के लिए कौन कौन सा काम हो इसके लिए यह समागम का आयोजन किया गया है। समागम में चर्चा का विषय 


मठ मंदिर में हो शौक्षणिक माहौल।

धार्मिक न्यास बोर्ड अध्यक्ष प्रो. नंदन ने कहा भारत की आत्मा उसकी सनातन परंपरा में बसती है। मठ और मंदिर केवल पूजा अर्चना के स्थल नहीं है। बल्कि समाज के मार्गदर्शक शिक्षा के केंद्र स्वास्थ्य के संवाहक और संस्कृति चेतना के वाहक है। इसी उद्देश्य से हम लोगों ने संकल्प लिया है कि राज्य के प्रत्येक धार्मिक संस्था समाज के सकारात्मक परिवर्तन के अग्रदूत बने। जिसके कारण हम लोगों ने बिहार के सभी मठ मंदिरों को निर्देश भी दिया है। कि वहा शैक्षणिक गतिविधियां चलाए जहा चल रहा है। उसे और गति प्रदान करें। मठ मंदिरों में  पुस्तकालय, स्वास्थ्य केंद्र और गरीब बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था हो। संस्कृत पाठशाला, वेद पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होते रहे। मृत प्राय सभी संस्कृति विधालय को पुनर्जीवित करने का काम करे। समाजिक गतिविधियों को बढाए। समाज के गरीब बच्चियों का दहेज रहित शादी व्याह अपने मठ मंदिर में कराए। नशा मुक्ति और इसके जागरूकता के लिए अभियान चलाए। इससे समाज को बहुत बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा पहले हर मठ मंदिर में अपना अखाड़ा और व्यायामशाला होता था। जिसका कारण उन्होंने कहा जैसे स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ मन का विकास होता है। वैसे ही शरीर को स्वास्थ्य बनाने के लिए मठ मंदिर में अपना अखाड़ा हो। 

समागम में विचाराधीन।

उन्होंने कहा समागम के बाद मठ मंदिरों में यज्ञों का आयोजन, स्वास्थ्य शिविर और योग केंद्र की स्थापना, कौशल विकास व महिला सशक्तीकरण का कार्यक्रम, पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम और सांस्कृतिक पर्यटन और कार्यक्रम को प्रोत्साहित किया जाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा मठ मंदिर समाज सुधार शिक्षा संस्कार स्वास्थ्य और संस्कृति की दूरी बनेंगे बिहार की सनातन परंपरा को मजबूत करने के साथ-साथ समाज को नई दिशा देना ही इस समागम और बोर्ड का मुख्य उद्देश्य है।

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