सिंहेश्वर मधेपुरा
मधेपुरा जिला मुख्यालय स्थित सदगुरु कबीर देव ध्यान साधना संस्थान धर्म स्वरूप नगर वार्ड नंबर 2 मधेपुरा के प्रांगण में 3 दिवसीय ध्यान साधना शिविर आश्रम के अध्यक्ष प्रो. नवल किशोर साहब की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य प्रवक्ता के रूप में संतपंथ आश्रम मधेपुरा के महंत योगाचार्य असंग स्वरूप साहब ने कहा मनुष्यों को सहज चेतन स्वरूप के ध्यान में मग्न रहना चाहिए। और सद्गुरु के निर्णय वचनों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। ब्राह्मणवादी विचारधाराओं , अंधविश्वास, पाखंड को त्याग कर, मानव कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। अपने मन को ज्ञान के द्वारा जानकार बनाना चाहिए।
सद्गुरु कबीर शांति धाम मधेपुरा के महंत संत शुभ स्वरूप साहब ने कहा मन की तरंग मार लो बस हो गया भजन।आदत बुरी सुधार लो, बस हो गया भजन। हमें अपने मन से राग, द्वेष और ईर्ष्या को मार देना चाहिए। हमें मन को निर्मल बनना चाहिए। तभी हम ध्यान और साधना के मार्ग में सफल हो सकते हैं। तब हम परम शांति को प्राप्त कर सकते हैं। यही सद्गुरु कबीर साहब का उपदेश है। संत सुकुमार सदगुरु कबीर आश्रम मिठाई के महंत प्रो. भूपेंद्र साहब ने कहा हमें ध्यान और साधना के द्वारा मन को एकाग्रचित करना चाहिए। सदगुरु कबीर आश्रम रघुनाथपुर के महंत बेचन साहब ने कहा हमें सत्य का संग करना चाहिए। हमें सत्संग में संत गुरुजनों के बताए हुए उपदेशों को आत्मसात करना चाहिए। तभी हम सफल हो सकते हैं।
आश्रम के अध्यक्ष प्रो. नवल किशोर साहब ने कहा तीन दिवसीय ध्यान- साधना शिविर में -योग, आसन, प्राणायाम, ध्यान और साधना से हमारे शरीर और चेतना में नई ऊर्जा की प्राप्ति हुई है। हम सभी अभिभावकों, नौजवान साथियों, भाइयों और बहनों को सुबह- शाम योग, ध्यान, साधना करना चाहिए। प्रधान सचिव मिश्रीलाल साहेब ने कहा-ध्यान साधना से हमारे जीवन में नई ताजगी, नई ऊर्जा मिलती है। संत महापुरुषों के बताए हुए मार्गों पर हमें चलने की जरूरत है। उपाध्यक्ष सुखदेव साहब ने कहा मैं कौन हूं और जगत क्या है। सार क्या है, आसार क्या है, हमें इसे समझना अति आवश्यक है। कोषाध्यक्ष उमाशंकर साहब ने कहा भोग से ऊपर उठकर, योग साधना द्वारा जीवन की ऊंचाई पर हम पहुंच सकते हैं। मंच संचालक शिक्षाविद जयनारायण पंडित ने कहा ध्यान का अर्थ होता है सावधान रहना, होश में रहना, हमें व्यावहारिक और पारमार्थिक जीवन में हमेशा सावधान रहने की जरूरत हैं। हमें बड़ों का सम्मान करना चाहिए। इस धरती पर सभी मानव एक समान है। हमें सबों को प्रेम और श्रद्धा के साथ देखना चाहिए। हमें सबों की भलाई करनी चाहिए। तभी हम परम शांति प्राप्त कर सकते हैं। और मोक्ष का लाभ ले सकते हैं। हमें अपना कल्याण करना चाहिए। हमें अपने शरीर और मन से गंदगी को दूर करना चाहिए। यह कैसे दूर होगा। ध्यान और साधना के द्वारा मन हमारा निर्मल हो जाएगा। भजन उपदेशक संत अनिरुद्ध गोस्वामी, सेवानिवृत शिक्षक चंदेश्वरी, पंकज, साध्वी इंदिरा, बीरबल के द्वारा भजन के माध्यम से सबों के हृदय को जीतने का काम किया। मौके पर उपस्थित संत राम नारायण, संत वैरागी, संत बिंदेश्वरी साहब, महंत जीवन स्वरूप, संत घूरन, संत बीरबल शालिग्राम, दयानंद, गुलाब देवी, उर्मिला देवी, आशीष दास, अधिवक्ता बालकृष्ण, हिमांशु कुमार, रंजू देवी, विवेक कुमार, राज बल्लभ कुमार, रंजीत कुमार, कृष्ण कुमार एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण मौजूद थे।



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