न्यास की बैठक में सदस्यों की कलह खुलकर सामने आई। डीएम को कहना पड़ा लड़ना है तो बाहर जाइए।

 

बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर 


सिंहेश्वर मधेपुरा


सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति की बैठक में समिति सदस्यों का कलह खुलकर सामने आया। जब डीएम को कहना पड़ा लड़ना है तो बाहर चलें जाइए। जानकारी के अनुसार सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति की बैठक शनिवार को डीएम सह सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष विजय प्रकाश मीणा की अध्यक्षता में हो रही थी। सुत्र बताते हैं कि बैठक में सदस्यों ने एक दुसरे पर नीजी आरोप लगाना शुरू कर दिया। एक विजय कुमार सिंह ने कहा अतिक्रमण हटाने के लिए हम दो ही सदस्य वहा थे। और सदस्यों का साथ नही मिला। जबकि सभी सदस्यों को रहना था।  वरिष्ठ सदस्य सियाराम यादव ने कहा कौन नही था। हम तो नियंत्रण कक्ष में बैठे थे। तो सदस्यों ने आपस में ही बहस होने लगा। और कहा जो अतिक्रमण हटाने में नही था उसका वीडीओ बना हुआ है। इसी बीच महादलित सदस्य ने कहा की न्यास के काम 5 के लोग ही करते हैं। हमें पुछा भी नही जाता। महादलित जाति के कारण हम से कोई राय भी नही लिया ये 5 सदस्यों मनमानी करते हैं। अतिक्रमण हटाने के दौरान जब मुझे दुकानदारों के द्वारा मार लगी तो ये 5 सदस्य कहा थे। 18 बार फोन करने के बाद भी मेरे समस्या के लिए नही बैठे। वही उसके बाद कमिटी के पुनर्गठन की मामले में डीएम ने एसडीओ को नई कमिटी के गठन के लिए भी निर्देश दिया। तथा एक सदस्य विजेंद्र ठाकुर की जगह नया सदस्य बनाने के लिए एक पुर्व सदस्य कन्हैया ठाकुर का मामला उठा। तो सदस्य मदन मोहन सिंह ने कहा उस पर आरोप है। जिसके कारण उसे हटाया गया। डीएम श्री मीणा ने जिला के 4 सदस्यो की टीम को ही एक स्वच्छ छवी के सदस्य बनाने की बात कही। मालूम हो कि अभी तक पुर्व सदस्य विजेंद्र ठाकुर को बोर्ड ने हटाया ही नही है। न्यास ने 19 जुलाई 2023 को उनको हटाने के लिए बोर्ड से आग्रह किया है। अभी तक बोर्ड से कोई जबाव नही आया है। वही विजेंद्र ठाकुर की जिसका नाम आया उस पर सभी सदस्य आपस में ही भीड़ गए।  सदस्य संजीव ठाकुर ने कहा वह बाबा का जमीन अतिक्रमण कर रखा है। धीरे धीरे सदस्यों में तु तु मैं मैं होने लगी। इसको देख डीएम श्री मीणा ने कड़े शब्दों सदस्यों को कहा लड़ना है तो बाहर जाकर लड़े। बैठक से बाहर निकलिए। बैठक में जिस लेखापाल के कार्यकलाप पर डीएम ने उसके वेतन रोकते हुए 4 माह में किए गए कार्यों का रिपोर्ट की मांग की थी। सदस्यों के मेहरवानी से उसका कार्यकाल संतोष जनक हो गया। जबकि कार्यों के रोस्टर के अनुसार सभी प्रभारी से हर 3 दिनो पर उसके कार्यों की समीक्षा कर उनके द्वारा वसुली की राशि को न्यास कार्यालय में जमा कर मनी रसिद प्राप्त कर प्रबंधक को रिपोर्ट करना था। जो अब तक नही किया गया। वही सदस्यों ने अपने स्तर के साथ न्याय करते नही दिखे। छोटे छोटे कर्मचारियों की शिकायत को बैठक में रखा। जिसे वो खुद डील कर सकते थे। लोगो में चर्चा है कि सदस्यों की स्थिति ऐसी है कि अनुसेवक से भी नही बनता है। 

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