सिंहेश्वर मधेपुरा
वैसे तो बिहार में अभी कई मेडिकल कॉलेज खुलने वाला है। लेकिन जो मेडिकल कॉलेज पहले से खुला हुआ है उसे देखने की फुरसत जिम्मेदार को नही है। इतनी अनियमितता के बाद भी कंपनी पर कोई शिकायत नही की गई। यह एक यक्ष प्रश्न है। फिलहाल कोशी के लिए वरदान कहे जाने वाले 800 करोड़ की लागत से मरीजों के इलाज के लिए बने जन नायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज को खुद ही इलाज की जरूरत है। हालात इतने बुरे हैं कि यहां चिकित्सक सहित मेडिकल कॉलेज में कार्यरत कर्मी त्राहिमाम कर रहे है। तीन दिनों से हो रहे बारिश में ही पूरा मेडिकल कॉलेज को झील में तब्दील कर दिया है। जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के पांच बिल्डिगों में शायद ही कोई ऐसा वार्ड हो जहां बारिश का पानी न टपकता हो। कई वार्ड में बेड पर मरीज है और बेड के नीचे पानी बह रहा है। कई वार्डों में पानी घुसने के कारण वार्ड में रह रहे मरीज को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। पानी का रिसाव इतना तेज है कि सफाई कर्मियों के द्वारा पानी निकालने के तुरंत बाद ही दुबारा पानी वार्ड में भर जाता है। कई जगह बाहरी दिवाल में रिसाव के कारण दिवाल पसीज गया है। और वार्ड में पानी गिर रहा है। तथा दिवाल में सीलन और काई झलकने लगा है।
कभी हो सकता है बड़ा हादसा-
800 करोड़ के लागत से निर्मित मेडिकल कॉलेज में हालत ऐसी बनी हुई है। कि चिकित्सक, कर्मी सहित मरीजों को सिर्फ और सिर्फ परेशानी हो रही है। मेडिकल कॉलेज में हाई टेक्नोलॉजी के साथ अंडरग्राउंड वायरिंग किया हुआ है। और छत से लगातार पानी बह रहा है। और उस वायरिंग में छत से टपकता हुआ पानी कई जगह जा रहा है। जिस वजह से वायरिंग में कभी भी शॉर्ट सर्किट हो सकती है. जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज में अगर सॉर्ट सर्किट हुआ तो एक बहुत बड़ा हादसा हो सकता है। मेडिकल कॉलेज के ब्लॉक एक से लेकर पांच तक सभी बिल्डिंगों में बारिश का पानी का रिसाव होना निर्माण कंपनी के द्वारा किए गए निर्माण में अनियमितता की खुलकर गवाही दे रहा है।
मेडिकल कालेज के आगे लगा 2 फीट पानी। निकासी का नही है रास्ता
वहीं आईसीयू वार्ड के बगल में वेटिंग एरिया में भी पानी जमा है। कई ऐसे मरीज भी मिले जो इस 800 करोड़ के बिल्डिंग में छाता लेकर चल रहे थे।
इस बाबत मेडिकल कालेज की अधीक्षक मालती कुमारी ने बताया की छत पर के जल जमाव को हटाया जा रहा है। तथा मेडिकल कालेज और आगे के पानी के निकास के लिए एसडीएम को बताया गया है। तथा बिल्डिंग के रिसाव की सूचना विभाग को दिया जायेगा।






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