मधेपुरा।
जिले में डेंगू ने अपना पांव तेजी से पसार दिया है। अब जिले में डेंगू के 18 पॉजेटिव मरीज हो गये हैं। जबकि एक दर्जन के करीब मरीज सस्पेक्टेड है। डेंगू के इस तरह से पांव पसारने से लोगों में भय बन गया है। डेंगू के पांव पसरता देख स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर से लेकर स्वास्थ्यकर्मियों तक को अलर्ट मोड में ला दिया है। जिले के सभी पीएचसी में कीट के अलावा कम से कम दो बेड को आरक्षित कर दिया गया है। संदिग्ध की जानकारी मिलते ही विभाग पूरी तरह से लाइनअप हो रहा है। विभाग भी डरा है कि स्थिति पिछले साल की तरह नहीं हो। यही कारण है कि वर्तमान में प्रतिदिन 50 से 60 डेंगू की जांच हो रही है। इस मामले में जिला स्वास्थ्य समिति भी अपने स्तर से काम कर रही है। सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में जांच किट की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था की गई है। मधेपुरा सदर अस्पताल में डेंगू के एलिसा मैथड से जांच हो रही है। वहीं सदर अस्पताल में तो प्लेटलेट उपलब्ध नहीं है लेकिन मेडिकल कॉलेज में इसकी समुचित व्यवस्था नहीं है। सदर अस्पताल स्थित आईसीयू में डेंगू केयर सेंटर बनाया गया है। यहां चार बेड से सुसज्जित कमरा डेंगू मरीजों के लिए बनाया गया है। इसके अलावा प्रत्येक पीएचसी में इसके लिए अलग से वार्ड बनाया गया है। ताकि इस तरह के किसी भी मरीजों का इलाज किया जा सके। नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मुकेश सिंह ने बताया कि मामला संदिग्ध होने पर हमलोग पहले सीबीसी व एंटीजन कीट से जांच करते हैं। मामला पॉजेटिव होने के बाद हमलोग एलिसा मैथड से जांच करते हैं। उसमें पॉजेटिव होने पर डेंगू माना जाता है। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी अगर प्लेटलेट एक लाख से कम होता है तो जांच की जाती है।
एलिसा मैथड से पॉजेटिव आने वाले ही डेंगू के मरीज
हाल के दिनों में वायरल फीवर की संख्या काफी बढ़ी है। जिले में हर तीसरा आदमी इस तरह के फीवर से ग्रसीत है। लेकिन इसी बीच निजी क्लीनिक व अस्पताल ने डेंगू के नाम पर अपना रोजगार खोल लिया है। सदर अस्पताल के चिकित्सक बताते हैं कि डेंगू एनएस की जांच में पॅाजेटिव होने पर सीधे मरीजों को डेंगू का डर बैठा दिया जाता है। उसके बाद मरीजों को जमकर आर्थिक दोहन होता है। वहीं कीट में भी पॉजेटिव होने पर डेंगू बता दिया जाता है। जबकि नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सिंह कहते हैं कि जबतक एलिसा मैथड से यानि डेंगू का आइजीजी व आईजीएम पॉजेटिव नहीं हो, तब तक डेंगू का मरीज नहीं माना जाएगा। उन्होंने चेताया कि निजी क्लीनिक व अस्पताल ने इस तरह की हरकत किया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला वैक्टर बोर्न डिजिज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि डेंगू को लेकर नियमित बैठक हो रही है। सभी पीएचसी को आवश्यक निर्देश दिया गया है। कोई भी संदिग्ध सीधे पीएचसी आकर अपना जांच कराए।

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