बीपी मंडल इंजीनियरिंग कालेज में 6 दिवसी एफडीपी कार्यक्रम संपन्न
कोशी तक/ सिंहेश्वर मधेपुरा:- बीपी मंडल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मधेपुरा में मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी), आईआईटी पटना के सहयोग से आयोजित छह दिवसीय यूजीसी प्रायोजित संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 3 से 8 अगस्त तक आयोजित कार्यक्रम का विषय “साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग एवं ऑटोमेशन : अभियंत्रण एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान के भविष्य का निर्माण” था।
छह दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स, आईओटी सहित अभियंत्रण एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान की उभरती तकनीकों के अनुप्रयोगों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को नवीन तकनीकों से अवगत कराने के साथ उनके शिक्षण, अनुसंधान एवं व्यावसायिक कौशल को मजबूत करना था।
कार्यक्रम में आईआईटी पटना के विशेषज्ञों एवं अन्य विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न तकनीकी विषयों पर व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद करते हुए अपने अनुभव एवं विचार भी साझा किए।
समापन समारोह में एफडीपी समन्वयक डॉ. मनीष कुमार जायसवाल ने आभार व्यक्त करते हुए अतिथियों, एमएमटीटीसी आईआईटी पटना के पदाधिकारियों, विशेषज्ञ वक्ताओं, महाविद्यालय के प्राचार्य, सह-समन्वयक, तकनीकी एवं सहयोगी कर्मचारियों तथा प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की सफलता सामूहिक सहयोग, समर्पण और सक्रिय सहभागिता का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को एआई, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा और ऑटोमेशन जैसी तेजी से विकसित हो रही तकनीकों से अपडेट रहने तथा इन्हें शिक्षण एवं अनुसंधान में प्रभावी रूप से अपनाने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन में सह-समन्वयक प्रवीण कुमार, तकनीकी सहायक एवं आयोजन समिति के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रतिभागियों ने एफडीपी को ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताते हुए आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को एमएमटीटीसी, आईआईटी पटना की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कॉलेज प्रबंधन ने इसे संस्थान की महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय स्तर के अकादमिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की दिशा में संस्थान को नई पहचान मिलेगी।
एक टिप्पणी भेजें