डीएम, डीईओ और स्थानांतरण प्रमाणपत्र
कोशी तक/सिंहेश्वर मधेपुरा:- शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही का एक और शर्मनाक मामला सिंहेश्वर में सामने आया है, जहां मॉडल स्कूल मनोहर दुर्गा हाईस्कूल में नामांकन कराने के लिए एक छात्र पिछले एक महीने से दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर है। अधिकारियों की उदासीनता ऐसी कि छात्र का भविष्य अधर में लटक गया है।
कुमारखंड प्रखंड के करुवेली निवासी प्रिंस कुमार, जिसने दरबारी मध्य विद्यालय करुवेली से आठवीं पास की है, मॉडल स्कूल सिंहेश्वर में नामांकन के लिए 9 अप्रैल 2026 को विद्यालय से स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) लेकर पहुंचा था। लेकिन नामांकन प्रक्रिया में जिला शिक्षा पदाधिकारी के हस्ताक्षर की अनिवार्यता छात्र के लिए अभिशाप बन गई।
आरोप है कि छात्र कई दिनों तक जिला शिक्षा कार्यालय का चक्कर लगाता रहा, लेकिन न तो अधिकारी मिले और न ही किसी ने उसकी समस्या सुनने की जरूरत समझी। परेशान होकर छात्र ने 27 अप्रैल को मधेपुरा जिलाधिकारी से गुहार लगाई। बताया जाता है कि डीएम ने तत्काल जिला शिक्षा पदाधिकारी को फोन किया, लेकिन उन्होंने कॉल तक रिसीव करना जरूरी नहीं समझा।
इसके बाद शिक्षा विभाग की लापरवाही का सिलसिला और बढ़ गया। जिला शिक्षा कार्यालय से छात्र को कुमारखंड प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के पास भेज दिया गया। वहां भी “आदेश नहीं है” कहकर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया गया। आखिरकार कई दिनों की मिन्नतों और विद्यालय प्रधानाध्यापक के हस्तक्षेप के बाद 13 मई को हस्ताक्षर हो पाया।
इतना सब होने के बावजूद अब तक छात्र का नामांकन नहीं हो सका है। छात्र और उसके परिजन लगातार जिला शिक्षा कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां मौजूद कर्मचारी भी कोई स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं हैं।
प्रिंस कुमार का कहना है कि लगातार दौड़भाग से वह मानसिक रूप से परेशान हो चुका है और अब उसे अपना एक साल बर्बाद होने का डर सताने लगा है।
मामले को लेकर श्रृंगी ऋषि सेवा फाउंडेशन के मुख्य प्रबंधक सागर यादव ने कहा कि शिक्षा विभाग की लापरवाही ने एक छात्र का भविष्य संकट में डाल दिया है। वहीं फाउंडेशन के संस्थापक भास्कर कुमार निखिल ने जिला शिक्षा पदाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक साधारण नामांकन के लिए छात्र को इतने दिनों तक क्यों भटकना पड़ा? क्या शिक्षा विभाग में छात्रों के भविष्य से बड़ा अधिकारियों का लापरवाह रवैया हो गया है?
إرسال تعليق