
आधोरियो के द्वारा भगवान भोलेनाथ के भक्ति संगीत
कोशी तक/सिंहेश्वर मधेपुरा:- शिवगंगा तट पर गुरुवार को भारतीय नववर्ष के पावन अवसर पर आयोजित महाआरती ने सनातन परंपरा की भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और हर ओर आस्था की गूंज सुनाई दी।
महाआरती से पूर्व परंपरागत रूप से हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया। इस बार कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण काशी से पधारे विद्वान पंडित वैदिक शोभित पांडेय द्वारा कृष्ण आयुर्वेद हिरण्य केशी शाखा के अंतर्गत रुद्रम वेद पारायण रहा। उनके प्रभावशाली और ओजस्वी उच्चारण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अघोरियों ने प्रस्तुत किया शिव तांडव
वाराणसी से आई अघोरियों की टोली ने अपने अनूठे प्रस्तुति से आयोजन को और भी विशेष बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई, जिसके बाद शिव तांडव की रोमांचक प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
अघोरियों ने नरमुंड की मालाओं के साथ “होली खेले मसाने में” जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं। वहीं राधा-कृष्ण के प्रेम पर आधारित भजनों—“मेरी जान है राधा”, “मुरलियां दे दो राधा” और “मैं रूठूं तो मुझको ना मनाना राधा”—पर श्रद्धालु झूम उठे।
राधा और कृष्ण के राशलीला का अद्भुत नृत्य और संगीत
पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने इस पर्व को यादगार बना दिया। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता नजर आया।
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