कोशी तक/सिंहेश्वर मधेपुरा:- स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा जारी स्टाफ नर्सों के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण आदेश में आंशिक राहत देते हुए इसके प्रभावी होने की तिथि आगे बढ़ा दी गई है। विभाग के आदेश संख्या-284 (6 बी) एवं 285 (6 बी), दिनांक 26.03.2026 में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया गया है कि अब ये स्थानांतरण आदेश 1 जून 2026 से प्रभावी होंगे।
संशोधित निर्देश के अनुसार, 26 मार्च 2026 से प्रभावी कंडिका 2 को शिथिल कर दिया गया है। यानी जिन नर्सों को स्थानांतरण के तहत पहले ही विरमित (रिलीव) कर दिया गया था, उनका विरमन आदेश रद्द माना जाएगा। ऐसे सभी कर्मी अपने पूर्व पदस्थापन स्थल पर वापस योगदान देकर पूर्ववत कार्य करेंगे। इस प्रस्ताव को स्वास्थ्य विभाग के सचिव से अनुमोदन भी प्राप्त हो चुका है।
इधर, जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जेएनकेटी), मधेपुरा में नर्सों के बड़े पैमाने पर तबादले को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट के आसार पहले से ही बने हुए हैं। विभागीय आदेश के तहत यहां से कुल 107 स्टाफ नर्सों का स्थानांतरण विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कर दिया गया है, जबकि इसके बदले केवल 12 नर्सों की ही तैनाती की गई है।
जानकारी के अनुसार, जेएनकेटी से 48 नर्सों को जेएलएनएमसीएच भागलपुर, 25 को पूर्णिया मेडिकल कॉलेज, 13 को पीएमसीएच पटना तथा 21 नर्सों को राज्य के विभिन्न सदर व अनुमंडलीय अस्पतालों में भेजा गया है। वहीं, नई तैनाती में डीएमसीएच दरभंगा से 8, एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर से 1, सदर अस्पताल अररिया से 1 और सदर अस्पताल औरंगाबाद से 1 नर्स शामिल हैं।
हालांकि स्थानांतरण की तिथि आगे बढ़ने से फिलहाल मेडिकल कॉलेज को कुछ राहत मिली है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नर्सों के तबादले और सीमित नई तैनाती को लेकर चिंता बरकरार है। पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे इस संस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने विभाग से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि या तो स्थानांतरण को रोका जाए या पर्याप्त संख्या में नई नर्सों की तैनाती की जाए, ताकि मरीजों को बेहतर और सुचारु स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहें।
फिलहाल, 1 जून के बाद की स्थिति को लेकर सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।

إرسال تعليق