परदेश कमाने गए मजदुरो की छठ पर्व पर घर लौटने की कहानी है "छठ की आस"

 

छठ पर्व मनाने का सजीव चित्रण करते कलाकार 



कोशी तक/ मधेपुरा:- छठ पर्व पर आधारित लघु फिल्म "छठ की आस" 23 को रिलीज किया जाएगा। यह फिल्म बिहार के उन लाखों प्रवासी मजदूरों की अपनी कहानी बयां करती है जो रोजगार के लिए दूसरे राज्यों जैसे दिल्ली और पंजाब में जाते हैं, लेकिन छठ पर्व पर अपने परिवार के साथ इस महत्वपूर्ण त्योहार को मनाने के लिए कठिनाइयों का सामना करते हैं। परंतु छठ पर्व के समय अपने परिवार के साथ यह पावन पर्व मनाने के लिए तमाम कठिनाइयों का सामना करते हैं। फिल्म की कहानी में दिखाया गया है कि किस तरह ये प्रवासी मजदूर कंपनी से छुट्टी लेने या छठ स्पेशल ट्रेन पकड़ने के लिए संघर्ष करते हैं। ताकि अपने गांव लौटकर मां, बहन और पत्नी के साथ सूर्य उपासना के इस महापर्व में शामिल हो सकें। दूसरों के घर बनाने वाले ये मजदूर खुद की खुशियों के लिए कितना त्याग करते हैं। यही इस फिल्म का भावनात्मक केंद्र है। छठ पर्व पर घर लौटने की जद्दोजहद का नयनाभिराम मनमोहक दृश्य 

यह फन फिल्म एंटरटेनमेंट के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया जाएगा। फिल्म की कहानी और परिकल्पना नंदन कुमार नंदन के द्वारा की गई है। जबकि निर्देशन शनिउल्लाह काजमी एवं सह-निर्देशक सुनीत साना हैं। फिल्म में शनिउल्लाह काजमी, नंदन कुमार नंदन, सुनीत साना, कुमार भारतेंदु, छोटू यदुवंशी, साक्षी गिरी, सुमन कुमारी, संतोष शहंशाह, पंकज पियवा, नीतीश कुमार, बबलू शर्मा, सत्य सिंह सहित अन्य कलाकार अभिनय करते दिखेंगे. कैमरामैन श्यामल सम्राट, फिल्म के निर्माण में साकेत सौरभ, राजन कुमार, डा. अजय कुमार कुंदन, रमेश कुमार, बिहार ट्रांसपोर्ट सहित अन्य सहयोग अपना भरपूर सहयोग दिया है। छठ से पहले आने वाली यह लघु फिल्म बिहार की सामाजिक स्थिति का बखान करती है। 

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