कृषि विज्ञान केन्द्र मधेपुरा में प्राकृतिक खेती को सफल बनाने हेतु दिया गया प्रशिक्षण

 कृषि विज्ञान केन्द्र में प्राकृतिक खेती को सफल बनाने हेतु दिया प्रशिक्षण प्रशिक्षण में भाग लेने पहुंचे महिलाएं 



कोशी तक/ मधेपुरा:- कृषि विज्ञान केंद्र मधेपुरा में प्राकृतिक खेती को सफल बनाने के लिए आयोजित पांच दिवसीय कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में जिले की 20 कृषि सखियां हिस्सा ले रही हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को रसायन मुक्त और पर्यावरण अनुकूल खेती से जोड़ना है।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:

प्राकृतिक खेती का महत्व : 

केवीके के प्रधान सुरेंद्र प्रसाद चोरसिया ने कहा कि प्राकृतिक खेती आज समय की मांग है, जिससे किसान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर सुरक्षित उत्पादन कर सकते हैं।

क्लस्टर स्तर पर प्राकृतिक खेती : 

जिला कृषि पदाधिकारी रितेश रंजन ने बताया कि कृषि सखियों के माध्यम से क्लस्टर स्तर पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों को अतिरिक्त आय भी होगी।

प्रशिक्षण की जानकारी: 

किसान मास्टर ट्रेनर उपेंद्र कुमार योगी ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, बायो रिसोर्स सेंटर और मिट्टी जांच की जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक राहुल वर्मा ने बीज उत्पादन और जीवामृत, घन जीवामृत, बीजा मृत की जानकारी दी, जबकि डा. सुनिल कुमार ने पोषण सुरक्षा पर प्रकाश डाला।

वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती के बताए लाभ:

- मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है

- किसानों की लागत कम होती है

- पर्यावरण संरक्षण होता है

- किसानों को अतिरिक्त आय होती है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से कृषि सखियां प्राकृतिक खेती के महत्व को समझकर अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों तक पहुंचाएंगी और उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी। 

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