नहाय खाय के साथ शुरू हुआ जितिया पर्व।

 फाईल फोटो जितिया पर्व करती महिलाएं 



कोशी तक/ सिंहेश्वर मधेपुरा:- आज से जितिया पर्व नहाय खाय के  साथ ही शुरू हो गया। जितिया पर्व संतान की आयु, स्वास्थ्य और परिवार की समृद्धि के लिए बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। व्रत का उद्देश्य संतान को बुरी नजर से बचाकर स्वस्थ निरोग रखना माना जाता है। व्रती महिलाएं इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करके संतान के दीर्घायु होने की कामना करती है।इसे कठिन व्रतों में गिना जाता है क्योंकि इसमें माताएं निर्जला उपवास करती हैं यानी पूरे दिन न तो भोजन करती हैं और न ही जल ग्रहण करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। 

व्रत की पौराणिक कथा सारांश 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माना जाता है कि जितिया व्रत की शुरुआत कलियुग में हुई थी। कथा के अनुसार जीमूतवाहन नामक एक राजा ने एक स्त्री के पुत्र को बचाने के लिए स्वयं को गरुड़ देव के भोजन के रूप में प्रस्तुत कर दिया। उनकी यह निःस्वार्थ भावना देखकर गरुड़ प्रसन्न हो गए और उन्हें वैकुंठ जाने का आशीर्वाद दिया। साथ ही उन्होंने अन्य बच्चों को भी पुनर्जीवित कर दिया। तभी से यह परंपरा प्रारंभ हुई कि माताएं अपने बच्चों की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए जीमूतवाहन देवता की आराधना करते हुए यह उपवास रखती हैं।

रविवार को निर्जला उपवास सोमवार को पारण।

इस बार मुख्यतः यह व्रत रविवार को होगा एवं  व्रत का पारण सोमवार की सुबह 6.36 बजे के बाद किया जाएगा। इस बाबत बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर के वरिष्ठ पुजारी अमरनाथ ठाकुर उर्फ लालबाबा ने बताया कि व्रत की आरंभ शनिवार को तेल खली के साथ नहाए-खाए से होगा। महिलाएं स्नान-ध्यान कर जीमूतवाहन जी की पूजा करती हैं। इसके बाद भोजन ग्रहण करती हैं। नहाय-खाय के दिन मडुआ की रोटी और नोनी की साग खाई जाती है। इसके साथ ओठगन में दही और चूड़ा खाया जाता है। मालुम हो कि सप्तमी तिथि शनिवार को 11.14 मिनट से शुरू होकर रविवार 8.50 तक रहेगा।  और अष्टमी 8.50 मिनट से शुरू हो रहा है। इसलिए ओठगन का समय 14 सितंबर की अहले सुबह 4.30 बजे तक हो जाना चाहिए।

सोमवार सुर्योदय के बाद होगा पारण।

वैदिक पंचांग के अनुसार, 15 सितंबर को देर रात 06 बजकर 36 मिनट पर अष्टमी तिथि का समापन होगा। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। जितिया व्रत का पारण नवमी तिथि पर किया जाता है। इस प्रकार 15 सितंबर सोमवार को सूर्योदय के बाद व्रती पारण कर सकती हैं।

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