रंगकर्मियों ने हिन्दी नाटक के जरिए संदेश मूलक प्रस्तुति दी।

 

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करते 


सिंहेश्वर मधेपुरा


जिला मुख्यालय के कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अंबिका सभागार में डा. केके मंडल की अध्यक्षता में साप्ताहिक हिन्दी दिवस मनाया गया। जिसमें हिन्दी के विकास के लिए सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाली संस्था सृजन दर्पण के सचिव सह युवा रंगकर्मी और निदेशक विकास कुमार के निर्देश में संस्था के रंगकर्मी नीरज कुमार, शशि कुमार, संध्या यादव, स्नेहा कुमारी, शिवानी कुमारी एवं अभिलाषा कुमारी आदि ने हिन्दी नाटक की संदेश मूलक मंचन किया। नाटक हिन्दी के विकास के माध्यम से कलाकारों संदेश मूलक प्रस्तुति दी। मौजूद दर्शकों ने रंगकर्मियों के शानदार प्रस्तुति की ताली की गड़गड़ाहट से सराहना की। इस अवसर पर छात्र- छात्रों के बीच हिन्दी में भाषण, निबंध, लेखन, चित्रकला एवं प्रोजेक्ट में टीपीएस के निदेशक एवं कौशिकी के उप सचिव श्यामल कुमार सुमित्र के निर्देशन में चारो विधाओं में प्रथम आने वाले चार छात्र- छात्राओं वर्ग 10 के पीयूष झा, अमीषा राज, वर्ग 9 के प्रकृति सुरभि तथा वर्ग 6 के विवेक कुमार को अध्यक्ष डा. केके मंडल, मुख्य अतिथि प्रो. सचिंद्र एवं सम्मेलन के सचिव डा. भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा छात्रों सहित प्रतिभागी कलाकारों को पुरस्कृत किया गया।

पुरस्कृत 6, 9, और 10 कक्षा को छात्रा 

इस अवसर पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को याद करते हुए बीएनएमयू के मानविकी के डीन प्रो. डा. विनय कुमार चौधरी का कौशिकी द्वारा सारस्वत सम्मान किया गया। जिन्होंने हिन्दी में डी.लिट् की उपाधि ही नहीं प्राप्त की है बल्कि तीन दर्जन पुस्तकों के रचनाकार भी हैं। डा. विनय ने अपने संबोधन में राष्ट्रकवि दिनकर को ओज और उत्साह का कवि कहते हुए विस्तार से उनकी काव्य यात्रा का वर्णन किया। मुख्य अतिथि प्रो. सचिंद्र महतो ने कहा कि दिनकर जी विश्व मानवता के विकास में भारत की अग्रणी भूमिका चाहते थे। मौके पर सम्मेलन के सचिव डा. भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि यशस्वी राष्ट्रकवि दिनकर की लोकप्रियता का कारण उनकी क्रांतिकारी और राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत उनकी रचनाएं हैं। डॉ. मधेपुरी ने दिनकर के खंडकाव्य 'रश्मिरथी' की चंद पंक्तियां सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और खूब तालियां बटोरी। डा. आलोक कुमार, डा. सीताराम शर्मा, डा. रामचंद्र मंडल, डा. विश्वनाथ विवेका एवं प्रो. मणिभूषण वर्मा ने कहा कि दिनकर के काव्यों में भावों, अनुभूतियों एवं शिल्प की दृष्टि से विविधताएं दृष्टिगोचर होती रही हैं। मौजूद साहित्यकारों डॉ.अरुण कुमार ने भी दिनकर के ओज-शौर्य तथा प्रो.डा. विनय कुमार चौधरी के सारस्वत सम्मान की भरपूर सराहना की।

मधेपुरी जी से पुरस्कार प्राप्त करते छात्रा 

अंत में अध्यक्षीय संबोधन में टीएमबीयू के पूर्व प्रति कुलपति एवं सम्मेलन की स्थाई अध्यक्ष डॉ. केके मंडल ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर हिन्दी साहित्य के इतिहास में छाया वादोत्तर काल के सशक्त और लोकप्रिय कवि के रूप में प्रसिद्ध हुए। दिनकर राष्ट्र गौरव का गान करते हुए विदेशी दासता से मुक्त करने का आकुल आह्वान भी करते रहे। दिनकर को ओज, उमंग, अग्नि धर्मा, क्रांति दूत, पौरुष और शौर्य के कवि के रूप में मान्यता मिली। कार्यक्रम के आरंभ में राष्ट्रकवि दिनकर के तैल चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि की एवं उपस्थित अतिथियों ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। अंत में सम्मेलन के उपसचिव श्यामल कुमार सुमित्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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